कांवड़ यात्रा:-
हर साल श्रावण मास में करोड़ो की तादाद में कांवडिये सुदूर स्थानों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं इस यात्राको कांवड़ यात्रा बोला जाता है।
हर साल श्रावण मास में करोड़ो की तादाद में कांवडिये सुदूर स्थानों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं इस यात्राको कांवड़ यात्रा बोला जाता है।
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| कांवड़ यात्रा के फायदे |
श्रावण की चतुर्दशी के दिन उस गंगा जल से अपने निवास के आसपास शिव मंदिरों में शिव का अभिषेक किया जाता है। कहने को तो ये धार्मिक आयोजन भर है, लेकिन इसके सामाजिक सरोकार भी हैं।
कांवड़ यात्रा के फायदे:-
कांवड़ यात्रा के फायदे:-
कांवड के माध्यम से जल की यात्रा का यह पर्व सृष्टि रूपी शिव की आराधना के लिए हैं।
पानी आम आदमी के साथ साथ पेड पौधों, पशु - पक्षियों, धरती में निवास करने वाले हजारो लाखों तरह के कीडे-मकोडों और समूचे पर्यावरण के लिए बेहद आवश्यक वस्तु है।
इस यात्रा से लोगों में भक्ति भावना जागृत होती है और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी ।
परन्तु इससे मोक्ष सम्भव नहीं है क्योंकि यह शास्त्रों के विरुद्ध है।
हमें शास्त्रों के अनुसार प्रमाणित भक्ति करने से ही मोक्ष व परम शांति प्राप्त होती है।
इसलिए वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज ही सम्पूर्ण विश्व में सत् भक्ति बताते हैं जिससे अनेकों लोगों को बहुत फायदा हो रहा है।
इसलिए आप सभी से निवेदन है कि संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान को समझकर व प्रमाण शास्त्रों में मिलाकर सत् भक्ति की ओर कदम बढ़ाने का प्रयास करें।
धन्यवाद
इस यात्रा से लोगों में भक्ति भावना जागृत होती है और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी ।
परन्तु इससे मोक्ष सम्भव नहीं है क्योंकि यह शास्त्रों के विरुद्ध है।
हमें शास्त्रों के अनुसार प्रमाणित भक्ति करने से ही मोक्ष व परम शांति प्राप्त होती है।
इसलिए वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज ही सम्पूर्ण विश्व में सत् भक्ति बताते हैं जिससे अनेकों लोगों को बहुत फायदा हो रहा है।
इसलिए आप सभी से निवेदन है कि संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान को समझकर व प्रमाण शास्त्रों में मिलाकर सत् भक्ति की ओर कदम बढ़ाने का प्रयास करें।
धन्यवाद





